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प्राकृति का उपहार बरहल (बडहल) खाने के फायदे

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बडहल एक ऐसा फल है जिसके फूल और फल दोनो खाये जाते है बडहर के फूल की सब्जी बनाई जाती हैं और फल का आचार बनाया जाता है और पकने पर फल खाया जाता है। बड़हल, बड़हर, टेऊ इसके कई नाम है। ये कटहल की प्रजाति के फल है । जिसे हमारी तरफ  बड़हर कहते है। जब आम का सीजन खत्म हो जाता है तब इस बड़हर का सीजन शुरू होता है।   इसके कच्चे रहने पर भी इसका उपयोग चटनी बनाने में किया जाता है। कच्चे बढ़हर का बहुत स्वादिष्ट अचार बनाया जाता है। पंजाब में टेऊ का अचार बहुत प्रसिद्ध है।  इस फल के अंदर भी कटहल की तरह ही चिपकने वाला लिसलिसा सा दूध निकलता है।  बचपन में हम सब इसे तोड़कर भूसे के ढेर में पकने के लिए छिपा देते थे। भूसे के गर्मी से आसानी से पक जाता था। उस समय हर तरह के फल को पकाने के लिए भूसे का ढेर सबसे बेहतरीन जगह होती थी। तब फलों को पकाने के लिए खतरनाक रसायन का प्रयोग नहीं किया जाता था।  पकने के बाद बड़हर खट्टा मीठा स्वाद लिए बहुत स्वादिष्ट लगता है। यदि आपको कभी बाजार में कच्चा मिले तो अचार बनाने या पका मिले तो खाने और बच्चों को चखाने के लिए अवश्य खरीदे। यह फल सेहत के लिए फायदेमं...

100 सोनार की एक लोहार की, सहजन अभूतपूर्व औषधीय पौधा

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सहजन एक बहु उपयोगी पेड़ है। इसे हिन्दी में सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा आदि नामों से भी जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे, "ड्रमस्टिक ट्री" भी कहते हैं। यह तेजी से बढ़ने वाला, सूखा से प्रभावित न होने वाला, मैरिनोग्रेसी कुल का पादप है।           ये ओषधियों गुणों से गूंथा हुआ हैं। ऐसा वृक्ष जिसका पत्ता , फल , फूल , फलियां, गोंद तो बहुउपयोगी है तो छाल भी बहुत गुणकारी हैं। आर्युवेदाचार्य #सुश्रुत ऋषि ने अपनी #सुश्रुतसंहिता में भी इस वृक्ष का वर्णन किया हैं। खासकर इसके फूलों को सबसे अधिक गुणकारी बताया हैं। पुराने वक्त में जब रोग कम होते थे तब भी 150 रोगों को शमन करने के लिए वैद्य सहजन का प्रयोग करवाते हैं।        यह भारत के हर क्षेत्र में पाया जाने वाला पौधा है। इसकी फूल, पत्ती, डाल, जड़ सभी में औषधीय गुण पाए जाते हैं जो मानव जीवन को स्वास्थ्य और निरोगी बनाए रखने में पूरा मदद करते है। इसकी खेती पश्चिमी प्रदेश में बहुतायत की जाती है। इसको सब्जी, पाउडर, काढ़ा की तरह से प्रयोग किया जाता है। आइए जाने सहजन के फायदे-  अचूक फायदे। 🌹 1- इम्...

बांस (bomboo) के आश्चर्य जनक तथ्य

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बाँस , ग्रामिनीई (Gramineae) कुल की एक अत्यंत उपयोगी घास है, जो भारत के प्रत्येक क्षेत्र में पाई जाती है। इसकी अनेक प्रकार की जाति होती है। मुख्य जातियाँ, बैंब्यूसा (Bambusa), डेंड्रोकेलैमस (नर बाँस) (Dendrocalamus) आदि हैं। बैंब्यूसा शब्द मराठी बैंबू का लैटिन नाम है। इसके लगभग 24 वंश भारत में पाए जाते हैं। बांस bomboo घर बनाने में ही नहीं अपितु स्वादिष्ट व्यंजन के लिए भी जाना जाता है। बांस शक्ति, सादगी और समृद्धि का प्रतीक होता है। वर्तमान समय में, बाज़ार में हज़ारों व्यावसायिक बांस उत्पाद उपलब्ध हैं और हर दिन नए अभिनव प्रयोग और अनुप्रयोग जुड़ते जा रहे हैं। इसमें निर्माण सामग्री से लेकर भोजन, दवा, संगीत वाद्ययंत्र, कपड़े, कागज़ की लुगदी, बाड़, टोकरी, बर्तन, साइकिल व अन्य सामग्रियां बनाई जा रही है।  यह हमारे जन्म से लेकर अंतिम संस्कार तक साथ निभाता है। * बांस एक ऐसा पौधा है जिसकी शाखा के अंदरूनी भाग (Bamboo Shoot) को खाया जाता है। * बांस के पत्तों और टहनियों में मुख्य एंटीऑक्सीडेंट फिनोल, विटामिन सी और ई और सेलेनियम, तांबा, जस्ता, लोहा और मैंगनीज जैसे खनिज तत्व हैं।...

दालचीनी आयुर्वेद का खजाना

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                          दालचीनी दालचीनी एक मसाला है, जो दालचीनी वृक्ष की छाल से प्राप्त किया जाता है। इसका पेड़ श्रीलंका एवं दक्षिण भारत में बहुतायत में मिलता है। इसकी छाल मसाले की तरह प्रयोग होती है। इसमें एक अलग ही सुगन्ध होती है, जो कि इसे गरम मसालों की श्रेणी में रखती है। दालचीनी प्राप्त करने की प्रक्रिया इस प्रकार है:-  1. छाल की कटाई: दालचीनी वृक्ष की छाल को गर्मियों के मौसम में कटाई की जाती है, जब यह सबसे पतली और सबसे सुगंधित होती है। 2. छाल को सुखाना : कटी हुई छाल को सुखाने के लिए धूप में रखा जाता है या विशेष मशीनों में सुखाया जाता है। 3. छाल को रोल करना: सूखी हुई छाल को रोल किया जाता है और इसे दालचीनी की छड़ियों में बदल दिया जाता है। 4. छाल को पाउडर में पीसना : दालचीनी की छड़ियों को पाउडर में पीसा जा सकता है, जिसे खाना पकाने और अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है। दालचीनी का उपयोग खाना पकाने, आयुर्वेदिक दवाओं, और सुगंधित उत्पादों में किया जाता है। यह एक लोकप्रिय मसाला है ज...

तिल के बारे में जानकारी

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तिल (Sesamum indicum) एक पुष्पिय पौधा है। इसके कई जंगली रिश्तेदार अफ्रीका में होते हैं और भारत में भी इसकी खेती और इसके बीज का उपयोग हजारों वर्षों से होता आया है। यह व्यापक रूप से दुनिया भर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पैदा किया जाता है। इसकी तासीर गर्म होती है ।   तिल के बीज से खाद्य तेल निकाला जाता है। तिल को विश्व का सबसे पहला तिलहन माना जाता है और इसकी खेती ५००० साल पहले शुरू हुई थी।    तिल में मैग्नीशियम होने के चलते  यह रक्त कोशिकाओं को रिलैक्स करने में मदद करता है और ब्लड प्रेशर के लेवल को मेंटेन रखता है . तिल में मौजूद जिंक और गुड़ में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग रखने में मदद करते हैं. तिल में मौजूद हेल्दी फैट्स और फाइबर भूख को कंट्रोल करने में मदद करता है. सेहत के लिए तिल के फायदे (Health benefits of sesame seed) O हार्ट हेल्थ के लिए बेहतरीन बनाता है। O कोलेस्ट्रोल को कम करने में सहायता करता है। O एनीमिया में फायदेमंद होता है।  O ब्लड शुगर कंट्रोल करता है। O कब्ज से छुटकारा दिलाता है। O स्किन के लिए फायदेमंद...

ठंड में पपीता खाने के फायदे

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पपीते की तासीर गर्म होती है। हर दिन पपीता खाने से दिल की बीमारियां, डायबिटीज, कैंसर और ब्लड प्रेशर की समस्या दूर होती है. आयुर्वेद में भी पपीते के कई फायदों के बारे में बताया गया है. आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि खाना खाने के बाद पके हुए पपीते का सेवन करने से कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है. पपीते में फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है। 200 ग्राम पपीते का रोजाना सेवन करने से बॉडी को भरपूर पानी मिलता है और बॉडी हाइड्रेट रहती है। आप इसकी सब्जी बना कर खा सकते है। पके पपीते का फ्रूट चाट  मजे से खाया जा सकता है। आइए जानते है कुछ अनजाने फायदे। पका पपीता खाने के कई फ़ायदे हैं:-  ⭐पपीता में विटामिन ए, सी, और ई होता है, जो शरीर को फ़्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है.  ⭐पपीता में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं.  ⭐पपीते में मौजूद फ़ाइबर, गंदे कॉलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है.  ⭐पपीते में मौजूद पपैन एंजाइम, प्रोटीन को छोटे पेप्टाइड्स और अमीनो एसिड में तोड़ देता है. इससे प्रोटीन से भरपूर ⭐भोजन को पचाने...