Posts

Showing posts from March, 2024

पापा और उनकी बेटी

Image
पापा_के_लाख_मना_करने_के_बावजूद_मैंने 3 साल पहले. घर से भागकर पंकज से शादी कर ली। शादी के पहले पंकज ने मुझे बहुत सारे ख्वाब दिखाए थे। कुछ दिन तक सब कुछ सही चला, फिर वह धीरे-धीरे.इसी बीच एक दिन मुझे पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूं। पंकज मेरी प्रेग्नेंसी की बात सुनकर भड़क गया, और मुझे अकेला छोड़ कहीं गायब हो गया।मैंने उसे ढूंढने की बहुत कोशिश की। पैसे भी मेरे पास खत्म हो गए थे। और घर में खाने के लिए भी एक दाना नहीं बचा था। भूख से टूटकर और मन से हार कर जब सारे रास्ते बंद नजर आने लगे, तो मुझे पापा की याद आई।अपने हारे हुए मन से मैंने पापा को फोन लगाया। पापा की जी भर रो लेने के बाद जब थोड़ा मन हल्का हुआ, तब पापा को मैंने सारी बात बताई और रोते हुए मन से कहा.. पापा मुझे एक बार और संभाल लो मैं अपने बच्चे को खोना नहीं चाहती।आवाज बंद हो गई और मैं बेहोश हो गई। इतना कहकर मेरी जब आंख खुली तो मैंने देखा, कि मेरा सर पापा की गोद में था, और वह मेरे सर पर बड़े प्यार से हाथ फेर रहे थे। उस दिन समझ आ गया कि दुनिया में मां-बाप से बढ़कर कोई प्यार नहीं कर सकता. सुख दुख आते रहते हैं लेकिन मां-बाप सिर्फ...

ऋषि दधीज के पुत्र पिप्पलाद के क्रोध को शिव जी ने शांत किया😊

देवराज इन्द्र तथा देवताओं की प्रार्थना स्वीकार करके महाशैव महर्षि दधीचि ने देह त्याग किया। उनकी अस्थियाँ लेकर विश्वकर्मा ने वज्र बनाया। उसी वज्र से अजेयप्राय वृत्रासुर को इन्द्र ने मारा और स्वर्ग पर पुनः अधिकार किया।' ये सब बातें अपनी माता सुवर्चा से बालक पिप्पलाद ने सुनीं। अपने पिता दधीचि के घातक देवताओं पर उन्हें बड़ा क्रोध आया। 'स्वार्थवश ये देवता मेरे तपस्वी पिता से उनकी हड्डियाँ माँगने में भी लज्जित नहीं हुए!' पिप्पलाद ने सभी देवताओं को नष्ट कर देने का संकल्प करके तपस्या प्रारम्भ कर दी। पवित्र नदी गौतमी के किनारे बैठकर तपस्या करते हुए पिप्पलाद को दीर्घकाल बीत गया। अन्त में भगवान् शंकर प्रसन्न हुए। उन्होंने पिप्पलाद को दर्शन देकर कहा-'बेटा! वर माँगो। पिप्पलाद बोले- 'प्रलयंकर प्रभु ! यदि आप मुझपर प्रसन्न हैं तो अपना तृतीय नेत्र खोलें और स्वार्थी देवताओं को भस्म कर दें। भगवान् आशुतोष ने समझाया-'पुत्र! मेरे रुद्ररूप का तेज तुम सहन नहीं कर सकते थे, इसीलिये मैं तुम्हारे सम्मुख सौम्य रूप में प्रकट हुआ। मेरे तृतीय नेत्र के तेज का आह्वान मत करो। उससे सम्पूर्ण विश्व...