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Showing posts from April, 2024

शिव रात्रि का महात्म

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  पौराणिक कथाओं के अनुसार महाशिव रात्रि शिव जी और माता पार्वती जी के पाणिग्रहण संस्कार का दिन माना जाता है। यह फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्शी तिथि को शिव जी ने वैराग्य छोड़कर  गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था। इसी लिए प्रत्येक वर्ष माता गौरी और शिव (शंकर) के विवाहोत्सव के उपलक्ष्य में ही शिव रात्रि का पर्व मनाया जाता हैं।

अमोघ श्री पाशुपतात्र स्तोत्र

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        निम्न स्तोत्र अग्नि पुराण से संबंधित है यदि साधक नियम पूर्वक 21 दिन इसका पाठ करता है तो इसका सकारात्मक असर अवश्य मिलता है। जय शिव🌹🙏               अमोघ श्री पाशुपतास्त्र स्तोत्र ॐ नमो भगवते महापाशुपतायातुलबलवीर्यपराक्रमाय त्रिपन्चनयनाय नानारुपाय नानाप्रहरणोद्यताय  सर्वांगडरक्ताय भिन्नांजनचयप्रख्याय श्मशान वेतालप्रियाय सर्वविघ्ननिकृन्तन रताय सर्वसिध्दिप्रदाय  भक्तानुकम्पिने असंख्यवक्त्रभुजपादाय तस्मिन् सिध्दाय वेतालवित्रासिने शाकिनीक्षोभ जनकाय  व्याधिनिग्रहकारिणे पापभन्जनाय सूर्यसोमाग्नित्राय विष्णु कवचाय खडगवज्रहस्ताय यमदण्डवरुणपाशाय  रूद्रशूलाय ज्वलज्जिह्राय सर्वरोगविद्रावणाय ग्रहनिग्रहकारिणे दुष्टनागक्षय कारिणे । ॐ कृष्णपिंग्डलाय फट । हूंकारास्त्राय फट । वज्र हस्ताय फट । शक्तये फट । दण्डाय फट । यमाय फट । खडगाय फट । नैऋताय फट । वरुणाय फट । वज्राय फट । पाशाय फट । ध्वजाय फट । अंकुशाय फट । गदायै फट । कुबेराय फट । त्रिशूलाय फट । मुदगराय फट । चक्राय फट । पद्माय फट । नागास्त्राय फट । ईशानाय फट । ख...

फर्क पड़ता है (अपनो के सहारे का)

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बुजुर्ग पिताजी जिद कर रहे थे कि, उनकी चारपाई बाहर बरामदे में डाल दी जाये। बेटा परेशान था...बहू बड़बड़ा रही थी....।कोई बुजुर्गों को अलग कमरा नही देता, हमने दूसरी मंजिल पर कमरा दिया.... AC TV FRIDGE सब सुविधाएं हैं, नौकरानी भी दे रखी है। पता नहीं, सत्तर की उम्र में सठिया गए हैं..? पिता कमजोर और बीमार हैं....जिद कर रहे हैं, तो उनकी चारपाई गैलरी में डलवा ही देता हूँ, निकित ने सोचा। पिता इच्छा की पू्री करना उसने स्वभाव बना लिया था। अब पिता की एक चारपाई बरामदे में भी आ गई थी। हर समय चारपाई पर पडे रहने वाले पिता अब टहलते टहलते गेट तक पहुंच जाते। कुछ देर लान में टहलते लान में नाती - पोतों से खेलते, बातें करते, हंसते , बोलते और मुस्कुराते। कभी-कभी बेटे से मनपसंद खाने की चीजें भी लाने की फरमाईश भी करते। खुद खाते , बहू - बेटे और बच्चों को भी खिलाते ....धीरे-धीरे उनका स्वास्थ्य अच्छा होने लगा था। दादा ! मेरी बाल फेंको। गेट में प्रवेश करते हुए निकित ने अपने पाँच वर्षीय बेटे की आवाज सुनी, तो बेटा अपने बेटे को डांटने लगा...अंशुल बाबा बुजुर्ग हैं, उन्हें ऐसे कामों के लिए मत बोला करो। पापा ...