चमत्कारी पौधा मकोय

मकोय का परिचय
मकोय को देसी भाषा में मोकोईय कहते है और अंग्रेजी में BLACK NIGHT OR NIGHT SHADE कहते हैं।
 यह एक छोटा-सा पौधा है जो भारतवर्ष के छाया-युक्त स्थानों में हमेशा पाया जाता हैं। मकोय में पूरे वर्ष फूल और फल देखे जा सकते हैं। मकोय में शाखायुक्त एक-डेड़ फुट तक उँची, तथा शाखाओं पर उभरी हुई रेखाएं होती हैं। इसके पत्तें हरें, अंडाकर या आयताकार, दन्तुर या खण्डित, 2-3 इंच लम्बे, एक-डेड़ इंच तक चौड़े होते हैं। फूल छोटे, सफेद वर्ण (रंग) बहिकक्षीय फूल दंडों पर 3 से 8 के गुच्छों मे नीचे झुके होते हैं। मकोय का फल छोटे, चिकना गोलाकार अपरिक्व अवस्था में हरे रंग के और पकने पर नीले या बैंगनी रंग के, कभी-कभी पीले या लाल होते हैं। बीज छोटे, चिकने, पीले रंग के, बैंगन के बीजों की तरह होते है परन्तु बैंगन के बीजों से बहुत छोटे होते हैं। पकने पर फल मीठे लगते हैं।
मकोय का दूसरा नाम ककमाची भी है। इस के पतियों मैं त्रिदोष नाशक गुण होते हैं। यह कुष्ट रोग और स्वरयंत्र के लिए लाभकारी होती है। 
"मकोय के सेवन से कोई नुकसान नहीं होता. फिर भी इसे किसी वैद्य की सलाह ले तो यह बहुत असरकारक होगा।"
मकोय के कई फ़ायदे हैं:- 
👉मकोय में कई गुण होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं. 
👉मकोय का सेवन करने से किडनी स्वस्थ रहती है. 
👉मकोय का सेवन करने से पेट साफ़ रहता है. 
👉मकोय का सेवन करने से सांस संबंधी विकारों में आराम मिलता है. 
👉मकोय का सेवन करने से बुखार में आराम मिलता है. 
👉मकोय का सेवन करने से पीरियड्स के दर्द में आराम मिलता है. 
👉मकोय का सेवन करने से हार्ट डिज़ीज़ में मदद मिलती है. 
मकोय का सेवन आंतरिक और बाहरी दोनों तरीकों से किया जा सकता है. इसका चूर्ण दूध या पानी के साथ लिया जा सकता है. इसका लेप बनाकर शरीर पर भी लगाया जाता है. साग बना कर खाया जा सकता है। इसको अर्क व काढे के रूप में पी सकते है। 
 

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